BAAL JHAROKHA SATYAM KI DUNIYA HAM NANHE MUNNON KA

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Wednesday, April 27, 2016

जन्म दिन मुबारक

प्रिय मित्रों आज मेरे सुपुत्र गिरीश कुमार शुक्ल (सत्यम ) का जन्म दिन है अपनी दुवाएं देने से पहले मन में प्रवल इच्छा है कि मेरे प्रभु घनिष्ठ इष्ट दिल के नजदीक रहने वाले मेरे प्यारे दुलारे मित्र गण अपने स्नेहिल दिल से अपना स्नेहाशीष बरसाएं आप सब को दूर से ही सही हम भी मुंह मीठा करा दें और बदले में आप से मिला प्यारा प्यारा आशीष का उपहार सदा सदा के लिए जमा कर लें .. राधे राधे 
प्रिय सत्यम जन्म दिन मुबारक हो प्रभु सदा तुम्हे खुश रखे अपने नाम के अनुरूप सत्यता की तरफ बढ़ते चलो मेहनत और कर्म तुम्हारे कल्पनों आशाओं के अनुरूप तुम्हारा साथ निभाएं सफलताएं तुम्हारी तरफ सदा बढ़ती रहें सुख समृद्धि साथ साथ तो आती रहेंगी प्रेम बरसाओ और पाओ कभी भी किसी का दिल न दुखाना अच्छी बातों अच्छे गुणों का सदा साथ देना और निकटस्थ लोगों से अच्छाइयों का वरण करना शेष तुम्हे सब स्वतः चुनना होगा जिंदगी माझी को इस भाव सागर में सब सिखा देती है जब वह पतवार लेकर कर्म में डाटा रहता है जय माता दी राधे राधे
हम सपरिवार तुम्हारी माता श्री और प्यारी भगिनियों की तरफ से तुम्हे अशेष शुभ कामनाएं
भ्रमर 5






बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Thursday, April 26, 2012

हैप्पी बर्थ डे टू “सत्यम “


हैप्पी बर्थ डे टू “सत्यम “
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मेरे प्यारे नन्हे मुन्नों 
मित्र हमारे दिल हो 
मात - पिता के बहुत दुलारे 
जग के तुम दीपक हो !
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आओ अपने नन्हे कर से 
सुन्दर प्यारा जहाँ बनायें 
सूरज चंदा तारों से हम 
झिलमिल -झिलमिल इसे सजाएं !
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प्रेम की बहती अमृत धारा 
कमल गुलाब खिले चेहरे हों 


मंद मंद मुस्कान विखेरे 
हम नूर नैन के दिलों बसे हों !
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फूल खिले हों चिड़ियाँ गायें 

नाच मोर हर दिन सावन हो 

ख़ुशी रहे "तुलसी" घर आंगन 
ज्ञान का दीपक ज्योति जगी हो 
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होली दीवाली से हर दिन 
झूमें हम - मन - मिला रहे 
गुडिया गुड्डे और घरौंदे 

अपनी दुनिया सजी रहे !
  
देश के वीर सपूत बनें हम 
भारत - माँ - के लाल बनें 
शावक से जब सिंह बनें हम 
गरजें अरि के काल बनें !

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सभी बड़े- छोटे- सब मिल के 
ह्रदय लगा  - दे - दें आशीष 
सदा सहेजे --  मै रखूँगा 
नमन करूँ - तुम गुरु हो- ईश !
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कल है मेरा जन्म-दिवस- 'प्रिय'
केक काटने आ जाना 

स्नेह लुटा बबलू पप्पू बन 
लड्डू -टाफी - खा जाना 

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गुब्बारे- संग -फूल खिलेंगे
खुश्बू  होगी- कविता होगी 
भ्रमर रहेंगे - मधुर गीत में 
काव्य गोष्ठी - अद्भुत होगी 
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आपका स्नेहाकांक्षी 'सत्यम"
द्वारा भ्रमर-५- २६.४.२०१२ 
प्रतापगढ़ उ.प्र. 



बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --