कविता शुक्ल द्वारा -गाँव का मंदिर पगडण्डी
सत्यम शुक्ल द्वारा -ये गुलाब का फूल खिला है आओ खुश्बू ले लो
कविता शुक्ल द्वारा-आओ गाँव की सैर कराएँ
हल जोता जा रहा है -उधर फसल भी कट गयी ढोई जा रही है ....
अरे रे नाम लिखने के चक्कर में -अध्यापक जी का चेहरा ही बंद -माफ़ करना
कविता शुक्ल द्वारा -अब सुन्दर साड़ी का किनारा बनाओ
कविता शुक्ल द्वारा- अरे ये वीरबल की खिचड़ी नहीं आप के लिए चाय बना रही हूँ
कविता शुक्ल द्वारा -अरे डरो मत बाबा - ये सुखा नहीं ठूंठ नहीं हुआ पतझड़ आ गया था न !!!
देखो न क्या प्रकृति का नजारा ले रही हैं मन मोहिनी -कविता
कविता शुक्ल द्वारा -अरे इतना भी मत सोचो क्या जेम्स वाट सा इंजन बनाना है क्या ???
हमें तो कला बहुत प्यारी है आओ अपनी अपनी पेन्सिल रंग तूलिका - ब्रश उठाओ और ये .......ये ......बन गयी पेंटिंग ..............
मजा आया न ??
बच्चों अब आप भी अपना अपना चित्र बना कर भेजो हम यहाँ लगायेंगे
हमारे चिटठा का पता है
skshukl5@gmail.comबच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --









