BAAL JHAROKHA SATYAM KI DUNIYA HAM NANHE MUNNON KA

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Friday, May 6, 2016

ये बादल तो अजब खिलाड़ी


ये बादल तो अजब खिलाड़ी
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कारे भूरे बादर , मम्मी
उमड़ घुमड़ कर आये
यहीं गांव में ताक झांक कर
तम्बू आज लगाए
अँधियारा मन खूब डराता
बिजली जल-जल फिर बुझ जाये
सर्कस जैसे अजब तमाशा
जैसे शेर हो गरजे जाए
भालू हाथी जोकर जैसे
नाना रूप दिखाते
ये बादल तो अजब खिलाड़ी
कभी हंसाते कभी रुलाते






मोती से ये झर-झर झरते
सुन्दर अति संगीत सुनाते
मेढक मामा की शादी में
ताल तलैया सब भर जाते
मम्मी मैं भी बाहर निकलूं
रिमझिम बारिश भीगूँ
नाव चलाऊं सीखूँ तरना
दुनिया सारी जीतूं ।

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५ 
कुल्लू हिमाचल 
६ मई २०१६ 

बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Sunday, December 4, 2011

कडवा मीठा पीना पड़ता

(all the photo's taken from google/net for good cause for lovely freinds)
जब जब छींके मेरे आती 
अम्मा मुझको दौड़ उठाती 
टोपी-स्वेटर लादे मुझको 
आँचल भर दिल से है लाती 
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कभी रजाई कम्बल में घुस 
जाने क्या क्या मुझे पिलाती 
तुलसी पत्ता अदरक काढ़ा 
काली मिर्च व् मधु दवाई 
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लौंग नमक हल्दी गुड जायफल 
कडवा मीठा पीना पड़ता 
नहीं तो नाक से पानी गिरता 
गाढ़ा हो पानी कफ बनता 
एक बार कफ बना अगर तो 
दस दिन वो -छुट्टी कर देता 
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सांस फूलती मन ना लगता 
जैसे -  और कई बच्चों का 
पुस्तक सोती घुसकर बस्ता 
रोते    बैठे -  गए -परीक्षा 
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ठण्ड से बचकर स्वस्थ रहूँ मै
पढ़ती जाती नित स्कूल 
सारा पाठ याद कर लेती 
कभी होती थोड़ी भूल 
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आओ बड़ों की बातें माने 
छप -छप पानी ना खेलें 



शीत लहर है बड़ा है कोहरा 



बादल वर्षा  से बच घूमें 



ठण्ड से बच सब पहने घूमे 
धूल  धुएं से बच हम रह लें 
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शुक्ल भ्रमर  
.०५-.४५- .१२.२०११ 
यच पी 


बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Tuesday, June 28, 2011

गरज-गरज बादल घिर आया



गरज-गरज बादल घिर आया 
आज सुबह आंधी बारिस से 
मौसम ठंडा हो आया 
रिमझिम-रिमझिम बूँद बरस के 
गरज -गरज बादल घिर आया 
सुबह भी जैसे शाम हो गयी 
फिर सोने को जी ललचाया 
बालकनी की मस्त हवाएं 
बूँदें रिमझिम -लपलप बिजली 
कुछ पल मम्मी भीगे -भागे 
दौड़ कभी फिर घर घुस आया 
मन ललचाता बाहर जाऊं 
चिड़ियों ने फिर मुझे सताया 
उस फाटक पर ग्रिल खिड़की पर 
चिड़ियों ने था डेरा डाला 
गौरैया -कोयल-खंजन थी 
बुलबुल-कौवा -कठफोड़वा से 
सभी चहक कर सीटी दे दे 
मेरा मन तो खूब लुभाया 
पंख भिगाए -गाल फुलाए 
झर -झर पंख कोई झारे
बाल संवारे कोई अपना 
फुदक के कोई उसे भगाए 
मजा बहुत आया पर मम्मी 
मै -मूरति सा खड़ा देखता 
घर में जैसे कैद रहा 
आगे जाता तो उड़ जातीं 
दूजे के सुख की खातिर माँ 
जो तूने सिखलाया था 
निज आनंद को भूल गया था 
उस फुहार रिमझिम बारिस का 
माँ -अद्भुत मजा मै ले पाया था !!

शुक्ल भ्रमर ५
२९.०६.२०११
जल पी बी 



बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --