BAAL JHAROKHA SATYAM KI DUNIYA HAM NANHE MUNNON KA

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Tuesday, July 24, 2012

चिड़िया रानी


 
चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर,
मीठा राग सुनाती हो।
आनन-फानन में उड़ करके,
आसमान तक जाती हो।।

मेरे अगर पंख होते तो,
मैं भी नभ तक हो आता।
पेड़ो के ऊपर जा करके,
ताजे-मीठे फल खाता।।

जब मन करता मैं उड़ कर के,
नानी जी के घर जाता।
आसमान में कलाबाजियाँ कर के,
सबको दिखलाता।।

सूरज उगने से पहले तुम,
नित्य-प्रति उठ जाती हो।
चीं-चींचूँ-चूँ वाले स्वर से ,
मुझको रोज जगाती हो।।

तुम मुझको सन्देशा देती,
रोज सवेरे उठा करो।
अपनी पुस्तक को ले करके,
पढ़ने में नित जुटा करो।।

चिड़िया रानी बड़ी सयानी,
कितनी मेहनत करती हो।
दाना-दुनका बीन-बीन कर,
पेट हमेशा भरती हो।।

अपने कामों से मेहनत का,
पथ हमको दिखलाती हो।।
जीवन श्रम के लिए बना है,
सीख यही सिखलाती हो।
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द्वारा रूप चन्द्र शास्त्री 'मयंक'




बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Tuesday, October 18, 2011

ठंडी की लम्बी रातों का जी भर लुत्फ़ उठायें



रात पूर्णिमा का चंदा था 
अम्बर था रोशन सारा 
टिमटिम टिमटिम चमक रहे थे 
नभ में प्यारे सभी सितारे 
शीतल बयार भी डोल रही थी 
शीत आ रहा बोल रही थी 
बादल सी कुछ धुंध दिखी थी 
घास पे मोती ओस के 
सूरज भी अंगडाई लेते 
निकला कितनी देर से 
उधर भंवर उस कमल के अन्दर 
बंद रात भर सोया था 
सुबह सुबह जब फूल खिले तो 
आँख मींचते भागा था 
चिड़िया भी कुछ गाल फुलाए 
चींची चूं चूं कर आयीं 
फड फड फड फड पंख फैलाये 
शोर मचाये मुझे जगाईं 
दिन अब छोटा पड़जाएगा 
निशा का पलड़ा भारी होगा 
आओ बच्चों हम भी बदलें 
दिनचर्या तौर तरीकों को 
सर्दी गर्मी से बच रह लें 
टोपी मफलर स्वेटर रख लें 
ठंडी की लम्बी रातों का 
जी भर लुत्फ़ उठायें 
चुपके चुपके जी भर पढ़ लें 
लम्बी चादर तान तान फिर 
गहरी निद्रा में खो जाएँ 
सुन्दर मीठे सपने प्यारे 
परियां देव दूत का डेरा 
मम्मी खुद ही गोद उठाये 
सूरज निकला भोर सवेरा

शुक्ल भ्रमर  -9.15 A.M.
१९.१०.२०११ जल पी बी 


बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --