BAAL JHAROKHA SATYAM KI DUNIYA HAM NANHE MUNNON KA

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Tuesday, August 9, 2011

बस्ता





इतनी ढेर किताबें देखो
बस्ता मेरा ढोता


धूप से इनको यही बचाए  
बारिस - छाता- होता
कविता रुचिकर देख किताबें
बड़े मजे से ढोता
लेकिन गणित और विज्ञान की




मोटी मोटी देख किताबें
मन में जैसे ये रोता 
जिस दिन छुट्टी हो जाती है
दौड़ा-आ -घर में सोता 
मेरे बस्ते पर एक कंगारू 
हिरन व् हाथी लदा हुआ
बस्ता सब से प्यार है करता
कभी न बोले - हटो जरा !!
( ALL THE PHOTOS TAKEN WITH THANKS FROM GOOGLE/NET)
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
२६.०६.२०११ जल पी बी 


बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --