BAAL JHAROKHA SATYAM KI DUNIYA HAM NANHE MUNNON KA

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Friday, May 6, 2016

ये बादल तो अजब खिलाड़ी


ये बादल तो अजब खिलाड़ी
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कारे भूरे बादर , मम्मी
उमड़ घुमड़ कर आये
यहीं गांव में ताक झांक कर
तम्बू आज लगाए
अँधियारा मन खूब डराता
बिजली जल-जल फिर बुझ जाये
सर्कस जैसे अजब तमाशा
जैसे शेर हो गरजे जाए
भालू हाथी जोकर जैसे
नाना रूप दिखाते
ये बादल तो अजब खिलाड़ी
कभी हंसाते कभी रुलाते






मोती से ये झर-झर झरते
सुन्दर अति संगीत सुनाते
मेढक मामा की शादी में
ताल तलैया सब भर जाते
मम्मी मैं भी बाहर निकलूं
रिमझिम बारिश भीगूँ
नाव चलाऊं सीखूँ तरना
दुनिया सारी जीतूं ।

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५ 
कुल्लू हिमाचल 
६ मई २०१६ 

बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Wednesday, April 27, 2016

जन्म दिन मुबारक

प्रिय मित्रों आज मेरे सुपुत्र गिरीश कुमार शुक्ल (सत्यम ) का जन्म दिन है अपनी दुवाएं देने से पहले मन में प्रवल इच्छा है कि मेरे प्रभु घनिष्ठ इष्ट दिल के नजदीक रहने वाले मेरे प्यारे दुलारे मित्र गण अपने स्नेहिल दिल से अपना स्नेहाशीष बरसाएं आप सब को दूर से ही सही हम भी मुंह मीठा करा दें और बदले में आप से मिला प्यारा प्यारा आशीष का उपहार सदा सदा के लिए जमा कर लें .. राधे राधे 
प्रिय सत्यम जन्म दिन मुबारक हो प्रभु सदा तुम्हे खुश रखे अपने नाम के अनुरूप सत्यता की तरफ बढ़ते चलो मेहनत और कर्म तुम्हारे कल्पनों आशाओं के अनुरूप तुम्हारा साथ निभाएं सफलताएं तुम्हारी तरफ सदा बढ़ती रहें सुख समृद्धि साथ साथ तो आती रहेंगी प्रेम बरसाओ और पाओ कभी भी किसी का दिल न दुखाना अच्छी बातों अच्छे गुणों का सदा साथ देना और निकटस्थ लोगों से अच्छाइयों का वरण करना शेष तुम्हे सब स्वतः चुनना होगा जिंदगी माझी को इस भाव सागर में सब सिखा देती है जब वह पतवार लेकर कर्म में डाटा रहता है जय माता दी राधे राधे
हम सपरिवार तुम्हारी माता श्री और प्यारी भगिनियों की तरफ से तुम्हे अशेष शुभ कामनाएं
भ्रमर 5






बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Wednesday, September 30, 2015

आओ हम प्रातः उठ जाएँ

आओ हम प्रातः उठ जाएँ
दोनों कर नैन भरे देखें
लक्ष्मी शारद सब दर्शन पाएं
माँ-पृथ्वी के हम गले लगें
भजन कीर्तन जुड़ प्रभु से
कुछ योग-ध्यान में खो जाएँ
ले दिव्य दृष्टि पाएं प्रभु को
जीवन को अपने सफल बनायें
आओ हम प्रातः उठ जाएँ
प्रातः वेला में घूम -टहल
देखें कलरव हर चहल पहल
जब खिलें पुष्प या पंकज दल
मन-हर माँ प्रकृति के सुखकर दृश्य
ले श्वांस तेज सब दिल में भर
मुस्काते -हँसते दिन-रैना
जीवन को अपने सफल बनायें
आओ हम प्रातः उठ जाएँ
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कुछ पुण्य करें कुछ दान करें
चिड़िया कौओं का ध्यान रखें
माँ-गौ माता को नमन करें
शीतल जल कुछ तो दे आएं
जो असहाय कहीं दुर्बल हैं
कुछ अंश प्रभु का दे आएं
ऊर्जा ऊष्मा आशीष सभी के
जीवन को अपने दिव्य बनायें
मुख -मंडल जब आभा अपने
मन ख़ुशी सभी को खुश रख के
हर कार्य सफलता पा जाएँ
आओ हम प्रातः उठ जाएँ
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हम स्वच्छ रहें परिवेश स्वच्छ
नित साफ़ सफाई मन लाएं
आरती वंदन मंदिर मस्जिद
गुरूद्वारे-चर्च कहीं जाएँ
है कोई करे नियंत्रित सब
हम प्रेम करें रखें कुछ भय
उस प्रभु में खो जाएँ पल -छिन
विचरें हम शून्य व् सूक्ष्म जगत
शुभ सुन्दर सच का करें वरन
जीवन आओ हम सफल बनायें
आओ हम प्रातः उठ जाएँ
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर
२०--२०१५
रविवार
.४२-.४२ पूर्वाह्न

कुल्लू हिमाचल प्रदेश भारत  


बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Sunday, April 26, 2015

आओ बाल गोपाल बनें हम

 प्रिय मित्रों आज हमारे सुपुत्र सत्यम ' गिरीश कुमार शुक्ल ' का जन्म दिन है आशा है आप सब का आशीष उसे मिलेगा ताकि जीवन पथ पर उजाला करते प्रगति पथ पर अग्रसर हो सके , मैंने भी इस अवसर पर निम्न रच डाला
जय श्री राधे



आओ बाल गोपाल बनें हम
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जन्म दिवस हो तुम्हे मुबारक
बल बुधि विद्या पाओ
संयम साहस प्रगति मार्ग पर
चले- प्रतिष्ठा पाओ
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एक बनो तुम नेक बनो हे !
करुणा दया दिखाओ
क्रोध अहं से दूर रहे हे !
प्रेम गीत गा हर दिल में छा जाओ 
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हो एकाग्री चित्त में संयम
लक्ष्य सुनिश्चित कर जाओ
करो साधना निष्ठा मेहनत
पूजा जैसे , फिर प्रसाद तुम पाओ
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सुखी हो जीवन खुशियाँ बरसे
सब मिल खुशियाँ बांटो
घर-आँगन नित शांति बनी हो
जीवन सफल बनाओ
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बड़ों का आदर ज्ञान की पूजा
अच्छाई का वरण करो
एक 'ओउम ' है कोई ना दूजा-
मान! हृदय पुष्प को खिला रखो
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आओ बाल गोपाल बनें हम
हरषे झूमे नाचें
माखन लड्डू स्नेह के खाकर
हर दिल में छा जाएँ
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आलस ईर्ष्या दम्भ बुराई
दुर्जन -दुर्गुण दूर रहें
सज्जन सद्गुण हर अच्छाई
अपना करके दिल में सबके बने रहें
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 सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर
२७.४.२०१५. ६.४२ पूर्वाह्न
कुल्लू हिमाचल




बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Saturday, June 14, 2014

पिता का त्याग



                                              पूजनीय पिताश्री "भ्रमर" जी   आप को शत शत नमन
आज पितृ दिवस है माता के साथ साथ हमारी जिंदगी में पिता की एक अनोखी और बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है माता पिता जीवन देते हैं एक मिटटी से लोथड़े रुपी बुत में प्राण भरते हैं दिन दिन कितने कष्ट सह कर पाल पोस कर ऊँगली पकड़ चलना सिखाते हैं उसे बड़ा करते हैं गुरु की भाँति सिखाते हैं एक प्रहरी की भाँति दिन रात रक्षा करते हैं प्रेम संस्कार जीवन कला सिखाते हैं और जैसे एक पौधे में बचपन में कील गाड़ दी जाए तो वो आजीवन उसमे धंसी रहती है और अच्छा बुरा अपनी भूमिका तय करती है उसी तरह बालपन में भरे गए हमारे संस्कार नैतिकता प्रेम सहनशीलता त्याग आदर भाव बड़े बड़े छोटे के प्रति यथोचित सम्मान आदि आदि बहुत कुछ जो की यहां वर्णन करना सम्भव ही नहीं आजीवन मानव के काम आते हैं और उसी तरह हमारी जिंदगी की खुशनुमा राह बनती है
पिता का त्याग , दूर पड़े रहना , आजीवन धनोपार्जन में लगे रहना , अपना सुख दुःख भूल किसी तरह से ये सोचना की हमारे लाल या ललना को किसी चीज की कमी नहीं हो उसकी पूर्ति करना
उसकी रक्षा करना उसे नियम नीति गुर सीखना और सबसे बड़ी बात दिल मजबूत करके अपने प्यारे दुलारे को जब जरुरत हो डाँट फटकार कर प्यार से किसी भी तरह से एक सीमा में बांधना अनुशासन सिखाना जो की एक बहुत ही कठिन कार्य है बच्चे जब बड़े होते हैं तो उच्छृंखल नदी झरने सा चल पड़ते हैं उन्हें सही दिशा देना बहुत ही महत्वपूर्ण है उस दशा में बच्चों से दोस्ती निभा प्यार जता की हम आप के शुभ चिंतक हैं संरक्षक हैं मार्ग दर्शक हैं अपना कार्य ठीक से कर ले जाना एक बहुत बड़ी चुनौती होती है पिता के लिए
अक्सर माँ से प्रेम पाते -पाते बच्चे बहक जाते हैं अनुशासन तोड़ने में उन्हें मजा आता है तब पिता की भूमिका बहुत ज्यादा होती है
इस तरह से हम पाते है कि पिता कि हमारे जीवन पथ में एक अहम भूमिका है हमें सदा उनका आदर करना चाहिए और उनके द्वारा कहे गए कड़वे वचन पर भी सोचना चाहिए उनके कर्म और संघर्ष के प्रति उनके प्रति सदा नमन करना चाहिए तभी हमारा जीवन सफल होगा माँ बाप अपने अधूरे सपनों को अपने बच्चों के द्वारा पूरा करते हैं उनका ये सपना सच हो जाए वे सदा खुश रहें आओ आजीवन उन्हें साथ रख हम ये प्रयास करते रहें और उनकी देखभाल तथा भरपूर प्यार दें
सभी पिता को हार्दिक नमन .....
आज पिता जी से बहुत दूर पड़े उनकी यादों में खोये आँखें नम हो जाती हैं बातें ही हो जाती हैं तो लगता है सर पर उनका वरद हस्त और आशीष मिला जीवन धन्य हुआ

गिरीश कुमार शुक्ल 'सत्यम'
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
कुल्लू
हिमाचल १५.६.२०१४


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं




बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Sunday, April 27, 2014

जन्म दिन मुबारक सत्यम










प्रिय मेरे नन्हे मुन्ने दोस्तों आदरणीय और प्रिय मित्र गण आज हमारे सुपुत्र  गिरीश कुमार शुक्ल 'सत्यम' का जन्मदिन है इस शुभ अवसर पर जैसे हम दूर दूर से दुवाए दे आज सत्यम का जन्म दिन मना  रहे हैं आप के लिये ये केक और मुख मिठास का यहॉं अयोजन है क़ृपया अपना स्नेहिल आशीष अपने  सत्यम को प्रदान करें आइये बच्चों को भरपूर प्रेम दें और अपनी इस भावी पीढ़ी को अपनी प्यारी संस्कृति और इस भारत भू के प्रेम , प्यार से भर दे ताकि इस भारत भू की रज मे ये पौधे खिलें खिलखिलाएं और इस अपने चमन को अपने सत्कर्मों से गुलजार करें गुल गुलशन महके और हम सब इस फुलवारी का आनन्द ले सकें

आप सब का बहुत बहुत आभार


प्रिय सत्यम ये ख़ुशी का दिन बार बार यूं ही आये प्रभु तुम्हे दीर्घायु करे खुशियाँ फलें फूलें इस ऑगन मे , अपने प्रेम सुकर्मों से सब का मन जीतो सब के प्यारे बनो समाज़ मे अपने अस्तित्व को अपने नाम की छाप बनाओ जन्म दिन मुबारक हो
पिताश्री और समस्त परिवार
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
प्रतापगढ़ भारत

बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Tuesday, March 4, 2014

fairwell -




प्रिय दोस्तों और सम्माननीय प्रबुद्ध जन ये रही मेरे कालेज में आयोजित  बारहवीं कक्षा से   विदाई  की  छवियाँ ( सामने से तीसरी पंक्ति में बाएं से दूसरा मै आप का सत्यम )  जिसे  मै आप सब से  सांझा  कर  रहा  हूँ  ,  आप सब बड़े, छोटे कृपया अपना आशीष दें ताकि पढ़ाई  में मन लगे एकाग्रता  बने और मै  परीक्षा में खरा उतरूँ,विदाई तो अश्रुपूर्ण होती ही है जिसके साथ खेला, खाया , चिढ़ा , चिढ़ाया, चुहलबाजी, कैसे उसे छोड़ा जाए लेकिन आगे जहां और भी है आइये चलते चलें बढ़ते फलते फूलते एक दूजे को सहारा देते ...
सभी दोस्तों को मेरा प्रेम भरा नमस्कार और सभी बड़ो को प्रणाम .....जय माँ शारदे वर दे वीणा वादिनि
जय श्री राधे
सत्यम शुक्ल (गिरीश कुमार शुक्ल)
द्वारा सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर ५
रायबरेली उ. प्रदेश

बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Monday, February 24, 2014

' सूरज' मेरा नाम

' सूरज' मेरा नाम
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मै चंदा का साथी प्यारा
'सूरज' मेरा नाम
उजियारा वो रात में देता
दिन में मेरा काम
चंदा के संग लाख सितारे
सौ सौ सूरज मेरे
चंदो को भी मै चमकाऊँ
दिल के पास जो मेरे
वो शीतल है शांत है हिम सा
मै हूँ आग का गोला
मुझमे गैस भरी है दहके
सबको प्राण मै देता
सुबह सवेरे पूरब से मै
निकलूं तुम्हे जगाऊँ
'लाल' ताम्र से हो जाता मै
जब सब सोता पाऊँ
तुम भी जागो प्राण -वायु लो
अमृत-रस पी जाओ
मुझ सा काम सभी के आओ
जग -रोशन कर जाओ
चंदा को 'मामा' कहते हो
सूरज को क्यों 'लाल'
मुझ सा काम करो तुम 'प्यारे'
तेरा चमके 'भाल'
जब चंदा कि बारी आती
देखो मै ना टांग अड़ाता
'पश्चिम' जा मै सो जाता हूँ
उष्की 'रचना' पर खुश होता !
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर'५
६.२५ मध्याह्न -६.४५ मध्याह्न
२३.२.२०१४
करतारपुर , जालंधर , पंजाब



बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Tuesday, August 20, 2013

आइये मेरे नन्हे मुन्ने दोस्तों इन जांबाज से मिलिए ,,,प्ले एंड सी वीडिओ







taken from facebook for lovely children with thanks,,,Bhramar5 बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Wednesday, August 14, 2013

कदम ताल से धरती कांपी- चले हिन्द के वीर

कदम ताल से धरती कांपी- चले हिन्द के वीर

कदम ताल से धरती कांपी
चले हिन्द के वीर
लिए तिरंगा चोटी  चढ़ के
   गरजे ले शमशीर .............
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भारत माँ ले रहीं सलामी
खुशियों का सागर उमड़ा
गले मिले सन्तति सब उनकी
ह्रदय कमल खिल-खिला पड़ा
कदम ताल से धरती कांपी ................
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भारत माँ   हैं जान से प्यारी
संस्कृति अपनी बड़ी दुलारी
प्रेम शान्ति का पाठ पढ़े हम
अनगिन भाषा खिले हैं क्यारी
कदम ताल से धरती कांपी ................
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नई नई नित खोज किये हम
विश्व गुरु बन दुनिया पाठ पढाये
वसुधा सागर गगन भेद के
सूक्ष्म ,तपस्या योग सिखाये
कदम ताल से धरती कांपी ................
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हम  स्वतंत्र हैं प्रजातंत्र है
अपना सब का प्यारा राज
यहाँ अहिंसा भाईचारा नीति नियम है
 सभी मनाएं भाँति -भांति हिल-मिल त्यौहार
कदम ताल से धरती कांपी ................
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शेर हैं हम नरसिंह है हम वीर बड़े हैं
अर्जुन एकलव्य से हैं तो भीष्म अटल हैं
कायर दुश्मन वार कभी पीछे करते हैं
लिए तिरंगा छाती चढ़ते वीर हमारे अजर अमर हैं 
कदम ताल से धरती कांपी ................
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प्रेम शान्ति का पाठ पढो हे दुनिया वालों
ना कर तांडव नाश सृष्टि का इसे बचा लो
ज्ञान दंभ पाखण्ड लूट बेचैनी से तुम घिरे पड़े हो
अन्तः झांको ,ज्वालामुखी धधकता 'स्वको अभी बचा लो
दूध की नदिया सोने चिड़िया से गुर सीखो
कल्पवृक्ष भारत अगाध है प्रेम लुटाना लेना सीखो
कदम ताल से धरती कांपी ................
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
प्रतापगढ़ भारत

कुल्लू -हिमाचल




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं



बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Monday, June 24, 2013

अम्मा दौड़ो छाता लाओ


अम्मा दौड़ो छाता  लाओ
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रिम-झिम रिम-झिम बारिस आई
फूलों पौधों को नहलाई
मंद-मंद पुरवाई आई
झूमे तरु सब पौधे डाली
भोर उठा चिड़ियों संग गाया
देख प्रकृति  मन खुश हो आया
हरी घास सब खेत बाग़ वन
परछाई जल में उलटे सब


कागज़ मोड़ा नाव चलाया
खेत बाँध मै  नदी बनाया
मेढक दादुर मोर शोर था
नाच रहा मन-मोर जोर था

अम्मा दौड़ो छाता  लाओ


मुझको बस तक तो पहुँचाओ
नहीं तो लथ-पथ हो जाऊंगा
सर्दी बुखार ले घर आऊँगा
अच्छीं अच्छीं छींकें आतीं
सिहरन ज्वर अलसाई आती
पुस्तक दोस्त बनाये दूरी
मेरे कारण  रात-रात तू जागे पूरी
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छवियाँ गूगल/नेट से साभार 
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5
14.06.2013
5.30-6.0 A.M.
कुल्लू हिमाचल

भारत



बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --