BAAL JHAROKHA SATYAM KI DUNIYA HAM NANHE MUNNON KA

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Saturday, June 14, 2014

पिता का त्याग



                                              पूजनीय पिताश्री "भ्रमर" जी   आप को शत शत नमन
आज पितृ दिवस है माता के साथ साथ हमारी जिंदगी में पिता की एक अनोखी और बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है माता पिता जीवन देते हैं एक मिटटी से लोथड़े रुपी बुत में प्राण भरते हैं दिन दिन कितने कष्ट सह कर पाल पोस कर ऊँगली पकड़ चलना सिखाते हैं उसे बड़ा करते हैं गुरु की भाँति सिखाते हैं एक प्रहरी की भाँति दिन रात रक्षा करते हैं प्रेम संस्कार जीवन कला सिखाते हैं और जैसे एक पौधे में बचपन में कील गाड़ दी जाए तो वो आजीवन उसमे धंसी रहती है और अच्छा बुरा अपनी भूमिका तय करती है उसी तरह बालपन में भरे गए हमारे संस्कार नैतिकता प्रेम सहनशीलता त्याग आदर भाव बड़े बड़े छोटे के प्रति यथोचित सम्मान आदि आदि बहुत कुछ जो की यहां वर्णन करना सम्भव ही नहीं आजीवन मानव के काम आते हैं और उसी तरह हमारी जिंदगी की खुशनुमा राह बनती है
पिता का त्याग , दूर पड़े रहना , आजीवन धनोपार्जन में लगे रहना , अपना सुख दुःख भूल किसी तरह से ये सोचना की हमारे लाल या ललना को किसी चीज की कमी नहीं हो उसकी पूर्ति करना
उसकी रक्षा करना उसे नियम नीति गुर सीखना और सबसे बड़ी बात दिल मजबूत करके अपने प्यारे दुलारे को जब जरुरत हो डाँट फटकार कर प्यार से किसी भी तरह से एक सीमा में बांधना अनुशासन सिखाना जो की एक बहुत ही कठिन कार्य है बच्चे जब बड़े होते हैं तो उच्छृंखल नदी झरने सा चल पड़ते हैं उन्हें सही दिशा देना बहुत ही महत्वपूर्ण है उस दशा में बच्चों से दोस्ती निभा प्यार जता की हम आप के शुभ चिंतक हैं संरक्षक हैं मार्ग दर्शक हैं अपना कार्य ठीक से कर ले जाना एक बहुत बड़ी चुनौती होती है पिता के लिए
अक्सर माँ से प्रेम पाते -पाते बच्चे बहक जाते हैं अनुशासन तोड़ने में उन्हें मजा आता है तब पिता की भूमिका बहुत ज्यादा होती है
इस तरह से हम पाते है कि पिता कि हमारे जीवन पथ में एक अहम भूमिका है हमें सदा उनका आदर करना चाहिए और उनके द्वारा कहे गए कड़वे वचन पर भी सोचना चाहिए उनके कर्म और संघर्ष के प्रति उनके प्रति सदा नमन करना चाहिए तभी हमारा जीवन सफल होगा माँ बाप अपने अधूरे सपनों को अपने बच्चों के द्वारा पूरा करते हैं उनका ये सपना सच हो जाए वे सदा खुश रहें आओ आजीवन उन्हें साथ रख हम ये प्रयास करते रहें और उनकी देखभाल तथा भरपूर प्यार दें
सभी पिता को हार्दिक नमन .....
आज पिता जी से बहुत दूर पड़े उनकी यादों में खोये आँखें नम हो जाती हैं बातें ही हो जाती हैं तो लगता है सर पर उनका वरद हस्त और आशीष मिला जीवन धन्य हुआ

गिरीश कुमार शुक्ल 'सत्यम'
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
कुल्लू
हिमाचल १५.६.२०१४


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं




बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Wednesday, August 14, 2013

कदम ताल से धरती कांपी- चले हिन्द के वीर

कदम ताल से धरती कांपी- चले हिन्द के वीर

कदम ताल से धरती कांपी
चले हिन्द के वीर
लिए तिरंगा चोटी  चढ़ के
   गरजे ले शमशीर .............
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भारत माँ ले रहीं सलामी
खुशियों का सागर उमड़ा
गले मिले सन्तति सब उनकी
ह्रदय कमल खिल-खिला पड़ा
कदम ताल से धरती कांपी ................
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भारत माँ   हैं जान से प्यारी
संस्कृति अपनी बड़ी दुलारी
प्रेम शान्ति का पाठ पढ़े हम
अनगिन भाषा खिले हैं क्यारी
कदम ताल से धरती कांपी ................
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नई नई नित खोज किये हम
विश्व गुरु बन दुनिया पाठ पढाये
वसुधा सागर गगन भेद के
सूक्ष्म ,तपस्या , योग सिखाये
कदम ताल से धरती कांपी ................
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हम  स्वतंत्र हैं प्रजातंत्र है
अपना सब का प्यारा राज
यहाँ अहिंसा भाईचारा नीति नियम है
 सभी मनाएं भाँति -भांति हिल-मिल त्यौहार
कदम ताल से धरती कांपी ................
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शेर हैं हम नरसिंह है हम वीर बड़े हैं
अर्जुन एकलव्य से हैं तो भीष्म अटल हैं
कायर दुश्मन वार कभी पीछे करते हैं
लिए तिरंगा छाती चढ़ते वीर हमारे अजर अमर हैं 
कदम ताल से धरती कांपी ................
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प्रेम शान्ति का पाठ पढो हे दुनिया वालों
ना कर तांडव नाश सृष्टि का इसे बचा लो
ज्ञान दंभ पाखण्ड लूट बेचैनी से तुम घिरे पड़े हो
अन्तः झांको ,ज्वालामुखी धधकता 'स्व' को अभी बचा लो
दूध की नदिया सोने चिड़िया से गुर सीखो
कल्पवृक्ष भारत अगाध है प्रेम लुटाना लेना सीखो
कदम ताल से धरती कांपी ................
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
प्रतापगढ़ भारत

कुल्लू -हिमाचल




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं



बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Tuesday, October 2, 2012

आओ बच्चों हम भी गांधी-लाल-बहादुर बन जाएँ

अपने इस चमन के दो निराले और प्यारे प्यारे  फूल , इन्हें नमन और हार्दिक श्रद्धांजलि

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी -जन्मदिन  2 अक्टूबर 1869 काठियावाड़  पोरबंदर गुजरात - मृत्यु - नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारने से 30.जनवरी 1948 दिल्ली (भारत को ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्ति दिलाने में हमारे शहीदों के साथ महान योगदान , अहिंसा के मतवाले , छुआ-छूत   भेद भाव मिटाने वाले , अमन चैन फैलाने वाले  , सत्य और अहिंसा के प्रयोग और आत्म-शुद्धि के प्रसार कर्ता )



प्रिय लाल बहादुर शास्त्री भारत के तीसरे और स्थायी तौर पर दूसरे   प्रधानमंत्री  -जन्म दिन 2 अक्टूबर 1904  मुगलसराय उत्तर प्रदेश -देहावशान  रहस्यमय ताशकंद में  11 जनवरी 1966 ,लाल बहादुर शास्त्री न केवल एक महान नेता थे, बल्कि राष्ट्रीय खजाना भी थे। वह प्रेम करने वाले व्यक्ति थे इमान की प्रतिमूर्ति थे  और मेरा और कई लोगों का मानना है कि वे देश के प्रधानमंत्रियों में सर्वश्रेष्ठ थे।



आओ बच्चों हम भी 
 गांधी-लाल-बहादुर बन जाएँ 
"लाल" बनें जो भारत माँ के 
सब अनीतियाँ टल जाएँ !!
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सत्य अहिंसा ईमाँ शासन 
छुआ-छूत ना भेद रहे 
चिड़ियों सा उन्मुक्त फिरें हम 
प्रेम सुशासन जग लायें !
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चरखा-खादी-आजादी ने 
कैसे - कैसे रंग दिखाया 
कितने कष्ट सहे लालों ने 
हमको "ऐसे" गले मिलाया !
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संत -फ़कीर ऋषि मुनि ‘इन’ से 
आओ ‘हम’ भी चोला रंग लें 
अच्छाई करुणा  अनुशासन 
सत्य , अहिंसा, समता व्रत लें !


'काँटा' दुनिया हमें कहे भी ना विचलित हों 
फूल' चमन की रक्षा करके खुशियाँ भर  दें   
गुल-गुलशन इस खिले चमन में खुश्बू ले के
गुन -गुन करते' भ्रमर' सा उड़ सन्देशा दे दें !
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'प्रेम' से जग को जीत सकें हम अटल सत्य ये 
आत्म-शुद्धि कर हर दिल राज करें भाई 
लहरे गंगा, फहर-फहर फहराए तिरंगा 
भेद भाव ‘हर’ बनें एक तो पायें सच्ची आजादी !
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गांधी -बापू राष्ट्र -पिता तुम 
'लाल' बहादुर सच्चे लाल 
'अमर' सदा तुम माँ के प्यारे 
जन-गण मन में तेरा राज !
अमन चैन के उड़ें कबूतर 
शान्ति -शान्ति अपना पैगाम !
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर'५ 
कुल्लू यच पी 
०२.१०.२०१२
७.३०-८ पूर्वाह्न 

ब्लागर -प्रतापगढ़ उ.प्र. 




बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Saturday, November 19, 2011

सबसे प्यारी -- "जान" है तू


















सबसे प्यारी -- "जान" है तू
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(photo with thanks from google/net,indianhindu names)
हे ! बिटिया तू कितनी प्यारी
सुन्दर- दिव्य - मूर्ति देवी
निर्मल पावन है गंगा सी
मुट्ठी भर-भर सब लायी

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सूनी कोख - तेरी माता की
पाँच साल - अब भर आयी
चेहरे पर मुस्कान है ऐसी
जाने कौन गड़ा धन पायी
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तू मुस्काती-हम सब खिलते
गोदी दौड़ उठाते
बचपन का सुख सब पाने को
पलकों तुझे बिठाते
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मेरी कल्पना - मेरी प्रतिभा
ममता मेरी- किरण है तू
तू सूरज है -तू चंदा है
आँखों का तारा री तू !
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तू आयी तो जोश बढ़ा रे
ख़ुशी भरी है नयी उमंगें
दौड़ भाग सब काम करें हम
रग रग में जोशीला खून
हवा है रूख में
देखों जैसे - उड़े पतंगे
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हम सब गर्व से शीश उठाते
पुरस्कार जब तू लाती
इतने बच्चों में अव्वल तू
पत्र पत्रिका -फोटो तेरी छप जाती
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बेटी अब पेट्रोल भरे है
बस-गाडी दौडाए
पुलिस मिलिट्री की कमान ले
भ्रष्टाचार मिटाए
झाँसी की रानी सी चमके
वायुयान उडाये
देश की बागडोर तू थामे
विश्व पटल पर छाये
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बेटी -बहना -वधू या माता
दुर्गा -काली -कितने रूप
जगजननी है- जग कल्याणी
ज्योति तू है - रूप अनूप
विद्या -लक्ष्मी -सरस्वती तू
शत शत नमन हे ! बिटिया रानी
सब से प्यारी -"जान " है तू
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
८.००-८.२० पूर्वाह्न
२०.११.२०११ यच पी



बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --

Sunday, August 21, 2011

आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में छाई खुशियाली श्याम जू पैदा भये


प्रिय  बच्चों मेरे प्यारे प्यारे दोस्तों  आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर ढेर सारी हार्दिक शुभ कामनाएं आइये आवाहन करें की कृष्ण हम सब में आयें और अनाचार मिटायें हमारे सभी आन्दोलन सफल हों और दुराचारी भ्रष्टाचारी मुह की खाएं-इस कलयुग में द्वापर की बातें याद आ जाती हैं -आज तो कितनी द्रौपदी बेचारी कोई कान्हा सा भाई नहीं पाती हैं ..ग्वाल बाल सब .सखियों सहेलियों का पवित्र प्यार अब कहाँ …जो भी हो आज अपने अंगना में गोपाला को आइये लायें ….गोदी में खिलाएं ….स्वागत करें …काले काले बदरा ..भादों का महीना … -भ्रमर ५
———–भ्रमर गीत———
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श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
ढोल मजीरा तो हर दिन बाजे
आज घर घर बजे सब की थाली
श्याम जू पैदा भये
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घुंघटा वाली नाचे चूड़ी कंगन बजाई के
बच्चे बूढ़े भी नाचें बजा ताली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
बदरा बजाये पशु पक्षी भी नाचें
पेड़ पौधों में छाई हरियाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
कृष्ण पाख कुछ चाँद छिपावे
आज घर घर मने है दिवाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
भादों में नदी नाले सागर बने
कान्हा चरण छुए यमुना भयीं खाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
पूत जने माई बप्पा तो झूमें
आज देशवा ख़ुशी भागशाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
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कृपया मेरी अन्य तरह की रचनाएँ मेरे अन्य ब्लॉग पर पढ़ें जो इस पृष्ठ पर दायीं तरफ रहती हैं ….
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
२२.०८.२०११
प्रतापगढ़ उ.प्र. ६.३० पूर्वाह्न



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Sunday, August 14, 2011

लिए तिरंगा मै निकला हूँ


हीरा हैं हम सोना हैं हम 
चांदी सा हम चमकेंगे !
सोने की चिड़िया, 
दूध की नदिया ,
"हरित-क्रांति" दिखलायेंगे !!
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गाओ बच्चों मेरे संग में !
मिल जाओ सब मेरे दल में !!
घर-घर से आवाज उठी है 
बन्दे मातरम -बन्दे मातरम !
लिए तिरंगा मै निकला हूँ 

कदम ताल कर -छम्मक छम !
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गाँव गली हर शहर नगर में 
रंग बिरंगा उत्सव है !
गीत शहीदों की गाते सब 
शीश झुका नतमस्तक हैं !!
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न्याय , अहिंसा, भाईचारा ,
प्रेम सभी दिल में भर दें !
दुश्मन कहीं जो आँख दिखाए 
धूल-धूसरित पल में कर दें !!
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सिंह से गरजें चोटी  चढ़ के 
कर अपनी चौड़ी छाती !
जल थल नभ की अपनी सेना 
दुनिया में गरजे जाती !!
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राखी बाँधे  जोश दिए हैं 
सब वीर अमर अपने भाई !
जन-गण मन अधिनायक जय हे 
गीत -सांस-अपनी थाती !!
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अग्नि- पृथ्वी- ब्रह्म-अस्त्र सब 
अब सब अपनी मुट्ठी में !
सोने सा तप के हम निकले 
मातृ-भूमि की भट्ठी से !!
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रहे न कोई क्षेत्र अधूरा !
कर पायें हम जो ना पूरा !!


माँ-भारती है गुरु हमारी !
बलि जाए हम प्राण पियारी !!
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अनुशासन में पल के बढ़ के 
नम्र शिष्ट हम बन जाएँ !
मातृ-भूमि की रक्षा में डट 
न्योछावर हम हो जाएँ !!
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल "भ्रमर"५
प्रतापगढ़ उ.प्र. ३.१२ पूर्वाह्न 
१५.०८.२०११ 




बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --