कुत्ता भौं भौं करते झपटा
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बैठ बैठ के थके तो
तितली का पीछा छोड़े मै
घर आया भागे दौड़े
धमक के ऊंची कुर्सी चढ़कर
आपरेटर बन बैठा
नन्ही नन्ही ऊँगली से मै
की बोर्ड को छेड़ा
मानीटर पर आदमी घूमा
चूहा इधर उधर था दौड़ा
कुत्ते का एक लगा था पहरा
ज्यों ही माउस को फिर मैंने
झपटे जरा दबोचा
कुत्ता भौं भौं करते झपटा
मुझको बड़ा डराया
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मिक्की माउस ना देखा
गुस्से में फिर बटन दबाया
मानिटर सी पी यूं जी का
फिर यू पी यस बंद किया
था तार वार सब नोच दिया
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पप्पा ने था भौं भौं सुन कर
बिजली बाहर से आफ किया
दौड़े दौड़े आये पकडे
गोदी ले समझाए
प्यार से थोडा डांटे मुझको
आँखों आंसू लाये
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चुम्मी मेरी लेकर फिर वो
हलराए-- दुलराये
बाल हनु मिक्की माउस से
सबसे मुझे मिलाये
क्या क्या कर सकता कम्प्यूटर
सब मुझको दिखलाए
लेकिन बिजली से बच बच के
रहना थे सिखलाये !
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शुक्ल भ्रमर ५
३०.११.११- ७-७.४८ पूर्वाह्न यच पी
बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --




