BAAL JHAROKHA SATYAM KI DUNIYA HAM NANHE MUNNON KA

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Thursday, November 3, 2011

नानी तुम भी कथा सुनाओ



बच्चों जब नानी घर जाना 
"भ्रमर" कथा सब उन्हें सुनाना
कहना भ्रमर एक बूढा साथी 
बच्चों का बनता जो हाथी 
सर माथे पे उन्हें चढ़ा कर 
जंगल जंगल सैर कराता
शेर दिखाता हिरन दिखाता 
बारह सिंगा मोर दिखाता 
(all the photos taken with thanks from google/net)
गीदड़ सियार बन्दर मामा संग 
चीता बाघ व् वन मानुष का 
मन भावन कुछ खेल दिखाता 
शुतुरमुर्ग मुर्गे मुर्गी संग 
तोता मिट्ठू सारस बगुला 
चीं चीं चूँ चूँ किये हँसाता
पीला पहने बाबा जैसे 
नाक रंग जोकर के जैसे 

सब बच्चों के दिल में छाता
छुक छुक गाडी कभी चलाकर 
जंगल मंगल सैर कराता 
अंगुली पकडे बच्चों जैसे 
घुल मिल खेले हँसता जाता 
झरने में पानी संग खेले 
रंग बिरंगी मछली देखे 
बड़ी बड़ी आँखों की चिड़िया 
उल्लू जैसे कभी डराता 

मगरमच्छ बन कभी डराए 
गेंडा  सींग  नाक पर लाये 
अस्त्र शस्त्र सब वस्त्र वहां पर 
राजा की पोशाकें देखो 
किला सा सारा भरा खजाना 
कैसा सुन्दर संग्रह सारा 
नानी तुम भी कथा सुनाओ 
भ्रमर के जैसे हंसी लगाओ !!

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५ 
५.१० पूर्वाह्न २०.१०.२०११ जल पी बी  


बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --